एक NRI कंटेंट क्रिएटर का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर ज़ोरदार चर्चा में है, जिसमें वह खुले दिल से मानती है कि कई मामलों में भारत सचमुच बाकी देशों से आगे है। घर से हज़ारों किलोमीटर दूर रहकर उसे पहली बार महसूस हुआ कि अपने देश की रोज़मर्रा की छोटी–छोटी सुविधाएँ और लोगों का अपनापन कितना अलग लेवल पर है।
उसने यह भी कहा कि जब तक इंसान अपने देश से बाहर नहीं जाता, तब तक उसे अपने ही सिस्टम की कुछ खास बातों की असली कीमत समझ में नहीं आती।
‘साइलेंट’ विदेश बनाम ज़िंदादिल इंडिया
क्रिएटर के मुताबिक, विदेशों की चमक–दमक के पीछे एक गहरी खामोशी भी छुपी रहती है। वहाँ की सड़कों की शांति, लोगों की सीमित बातचीत और ‘scheduled friendships’ यानी समय तय करके मिलने–जुलने की आदत दिल में खालीपन छोड़ देती है।
इसके उलट भारत में गली–मुहल्लों का शोर, पड़ोसियों से रोज़मर्रा की मुलाक़ातें, बिना अपॉइंटमेंट वाली मुलाक़ातें और लगातार चलती सामाजिक हलचल ज़िंदगी को जीवंत बना देती है, जिसे बाहर रहकर और ज़्यादा मिस किया जाता है।
इंडियन सर्विसेज़ की रफ़्तार और ह्यूमन टच
वीडियो में उसने मज़ाकिया अंदाज़ में बताया कि इंडिया की कुछ सेवाएँ तो वाकई “नेक्स्ट लेवल” हैं। खाने की डिलीवरी ऐप से लेकर रोज़मर्रा की सर्विस तक, कई काम मिनटों में निपट जाते हैं, जो पश्चिमी देशों में अक्सर ज़्यादा समय लेते हैं।
डॉक्टरों तक आसान पहुँच, तुरंत मिल जाने वाला कस्टमर सपोर्ट, और सर्विस सेक्टर में लोगों का दोस्ताना रवैया उसे भारत की सबसे बड़ी प्लस प्वाइंट लगती है, जहाँ टेक्नोलॉजी के साथ–साथ इंसानी जुड़ाव भी बना रहता है।
इंडिया vs USA: सोशल लाइफ़ की बात
उसका कहना है कि अमेरिका जैसे देशों में भले ही इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो, लेकिन सोशल लाइफ़ कई बार “मैकेनिकल” लगने लगती है।
भारत में त्यौहारों का शोर, चाट–पकौड़ी से लेकर चाय–कॉफ़ी तक स्ट्रीट फूड का कल्चर, अचानक होने वाली फैमिली गैदरिंग्स और लोकल मार्केट की रौनक – ये सब ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें कोई भी विदेशी सिस्टम कॉपी नहीं कर पाता।
सोशल मीडिया पर मिली मिली–जुली प्रतिक्रिया
जैसे ही यह वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया पर रिएक्शन की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने पूरी तरह सहमति जताते हुए लिखा कि विदेश में रहकर ही असल में भारत की अहमियत समझ आती है और यह कि देश की कई सुविधाएँ और रिश्तों की गर्माहट अनोखी है।
दूसरी तरफ़ कुछ यूज़र्स ने तंज कसे कि अगर बाहर इतना बुरा लग रहा है तो वापस इंडिया आना चाहिए, जबकि कुछ ने बहस को जाति–नस्ल जैसे मुद्दों तक घसीटते हुए आपत्तिजनक कमेंट भी कर दिए।
बहस में उठा भारत की कमियों का मुद्दा भी
सभी लोग सिर्फ़ तारीफ़ तक सीमित नहीं रहे। कनाडा जैसे देशों में रहने वाले कुछ भारतीयों ने यह भी लिखा कि भारत जितना भावनात्मक रूप से जोड़ता है, उतनी ही गंभीर चुनौतियाँ भी हैं, जैसे कई शहरों में हवा की गुणवत्ता का मुद्दा।
उनका तर्क था कि दिल भले ही भारत में बसता हो, लेकिन प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे भी सच्चाई हैं, जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।
नतीजा: दिल इंडिया के साथ ही धड़कता है
पूरी बहस के बाद भी एक बात साफ़ दिखी – जिस NRI ने वीडियो बनाया और जिन लोगों ने उस पर प्रतिक्रिया दी, दोनों ही वर्गों में भारत के लिए गहरा लगाव है।
चाहे कोई भारत की खूबियाँ गिनाए या कमियाँ याद दिलाए, भावनात्मक स्तर पर ज़्यादातर लोगों ने यही माना कि रिश्तों, सामाजिक जुड़ाव और “ह्यूमन टच” के मामले में भारत आज भी कई विकसित देशों से अलग पहचान रखता है।


