धुरंधर फिल्म में अक्षय खन्ना द्वारा निभाया गया रहमान डकैत (रहमान बलोच) असल ज़िंदगी के पाकिस्तानी गैंगस्टर सरदार अब्दुल रहमान बलोच उर्फ “रहमान डकैत” पर आधारित है, जो कराची के ल्यारी इलाके का कुख्यात डॉन था। फिल्म ने उसके जीवन, साम्राज्य और क्रूरता को सिनेमाई जरूरतों के हिसाब से बदला जरूर है, लेकिन बुनियादी किरदार व माहौल का स्रोत यही असली रहमान डकैत है।
रहमान डकैत कौन था?
असली रहमान डकैत का पूरा नाम सरदार अब्दुल रहमान बलूच था, जो कराची के ल्यारी इलाके में पैदा हुआ और वहीं पला-बढ़ा। ल्यारी को लंबे समय से कराची का सबसे खतरनाक और अपराध-ग्रस्त इलाका माना जाता रहा, जहां गरीबी, बदहाली और राजनीतिक सरपरस्ती के बीच गैंगस्टर आसानी से पनपते रहे।
रिपोर्टों के मुताबिक रहमान ने बहुत कम उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखा और उसे धीरे-धीरे इलाके के सबसे खतरनाक नामों में गिना जाने लगा। समय के साथ उसने न सिर्फ अपने लिए गैंग खड़ा किया, बल्कि ल्यारी के अपराध जगत और अवैध कारोबारों पर लगभग एकछत्र नियंत्रण बना लिया।
बचपन, माहौल और अपराध में शुरुआत
ल्यारी की तंग गलियां, बेरोजगारी, नशे और हथियारों की आसान उपलब्धता ने रहमान जैसे युवाओं को अपराध की तरफ धकेला। कई स्रोत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि उसने किशोरावस्था में ही हिंसक झगड़ों और नशे के धंधे से खुद को जोड़ लिया था।
कुछ रिपोर्टें दावा करती हैं कि 13–14 वर्ष की उम्र में ही वह अपने पहले हत्या जैसे संगीन अपराध में शामिल हो गया, जब एक झगड़े के दौरान उसने पड़ोसी पर जानलेवा हमला किया। शुरुआती दौर में वह छोटी-मोटी लूट, वसूली और ड्रग्स की सप्लाई जैसे अपराधों में शामिल रहा, जो आगे चलकर बड़े गैंगों तक पहुंचने की सीढ़ी बने।
हाजी लालू के गैंग से जुड़ाव
रहमान के अपराधी करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब वह कराची के बड़े डॉन माने जाने वाले हाजी लालू के गैंग से जुड़ा। बताया जाता है कि हाजी लालू ने इस कम उम्र अपराधी को अपने संरक्षण में लिया, उसे अपना “मुंहबोला बेटा” जैसा दर्जा दिया और अपने गैंग की कई अहम वारदातों में उसे आगे रखा।
हाजी लालू के लिए काम करते हुए रहमान ने फिरौती, सुपारी किलिंग, तस्करी और अवैध वसूली जैसे कामों में हिस्सा लिया, जिससे गैंग को करोड़ों की कमाई होने लगी। यही वह दौर था जब रहमान ने हथियारों, पैसों और राजनीतिक-सामाजिक नेटवर्क का महत्व समझते हुए खुद को सिर्फ “गुंडा” नहीं, बल्कि “सिस्टम” बनाने की तरफ बढ़ाना शुरू किया।
धोखा, टूटता भरोसा और क्रूरता का उभार
कई रिपोर्ट्स में एक घटना का ज़िक्र मिलता है, जिसने रहमान को भीतर तक झकझोर दिया और उसे और ज्यादा वहशी बना दिया। एक बड़े बिजनेसमैन के अपहरण और फिरौती के केस में, उसी हाजी लालू पर आरोप लगा कि उसने “इज्जत” और “रिश्ते” का हवाला देकर बंधक को छुड़वाया, लेकिन पर्दे के पीछे अलग से भारी रकम लेकर रहमान के साथ धोखा किया।
जब रहमान को जेल के भीतर यह बात पता चली कि जिसे वह बाप तुल्य मानता था, वही उसकी कमाई और उसकी मेहनत से बने “खौफ” का इस्तेमाल करके अपने लिए सौदे कर रहा था, तो उसके भीतर बदले की आग और बेकाबू हिंसा और बढ़ गई। इस घटना के बाद उसके तौर-तरीके और भी नृशंस हो गए और उसने अपने विरोधियों के साथ-साथ “धोखेबाज़ों” के लिए भी बर्बर सज़ाओं का रास्ता अपनाया।
ल्यारी का साम्राज्य और “सिस्टम”
2000 के दशक में रहमान ने ल्यारी में ऐसा गैंग-साम्राज्य खड़ा किया, जिसे कई रिपोर्ट्स “राज्य के भीतर समानांतर सत्ता” तक बताती हैं। उसने हफ्ता वसूली, ड्रग्स की सप्लाई, पानी के टैंकरों के रूट, दुकानें, ठेले और स्थानीय कारोबार सब पर अपनी पकड़ बना ली, जिसे कई स्रोत “पर्चा सिस्टम” व “पानी सिस्टम” जैसे नामों से जोड़ते हैं।
इस दौरान रहमान के साथ उसके कज़िन और सेकंड-इन-कमांड उज़ैर बलोच और सहयोगी बाबा लाडला जैसे नाम भी उभरे, जिनके साथ मिलकर उसने पूरे इलाके को लगभग युद्धभूमि में बदल दिया। गैंगवार, अपहरण, राजनीतिक हत्याएं और पुलिस पर हमले आम हो गए, जिससे ल्यारी की पहचान कराची के सबसे खौफनाक हिस्से के रूप में और पुख्ता हो गई।
राजनैतिक साया और “पीपल्स अमन कमेटी”
अपराध की दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ रहमान ने राजनीतिक रिश्ते भी बनाए, ताकि पुलिस और एजेंसियों से सुरक्षा मिल सके। इसी संदर्भ में उसके नाम को “पीपल्स अमन कमेटी” नामक संगठन से जोड़ा जाता है, जिसे कई विश्लेषक आम नागरिकों के हक़ की बात करने वाली संस्था से ज्यादा एक फ्रंट गैंग के तौर पर देखते हैं, जो किस्म-किस्म के अपराधों पर नियंत्रण रखती थी।
स्थानीय राजनीति, खासकर कुछ दलों के नेताओं के साथ उसके रिश्तों की बात रिपोर्टों में मिलती है, जहां गैंग चुनावों के दौरान इलाके में प्रभाव डालते और बदले में राजनीतिक संरक्षण पाते थे। इस तरह रहमान सिर्फ एक डॉन नहीं रहा, बल्कि स्थानीय सत्ता समीकरणों का अहम खिलाड़ी बन गया, जिसकी मर्जी के बिना इलाके में कोई बड़ा काम होना मुश्किल बताया जाता है।
क्रूरता की हदें और परिवार से जुड़ा काला अध्याय
रहमान डकैत की क्रूरता को लेकर कई तरह की दहशत भरी कहानियां दर्ज हैं, जिनमें से कुछ की पुष्टि अदालत या पुलिस रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय कथाओं से होती है। एक बेहद विचलित करने वाला आरोप यह है कि उसने किशोरावस्था के बाद के वर्षों में किसी पारिवारिक विवाद या शक के चलते अपनी ही मां की हत्या कर दी, जो बात कुछ पाकिस्तानी और भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स में दर्ज है।
इसी तरह एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि उसके गुर्गों ने कुछ दुश्मनों के सिर काटकर उन्हें फुटबॉल की तरह लात मार-मारकर “संदेश” दिया, ताकि इलाका और प्रतिद्वंद्वी गैंग उसके नाम से कांपें। यह सभी घटनाएं चाहे कानूनी तौर पर हर स्तर पर प्रमाणित न हों, लेकिन रहमान की छवि एक बेरहम, अमानवीय और सीमा-विहीन गैंगस्टर के रूप में गढ़ने में अहम रही हैं।
पुलिस, चौधरी असलम और “एनकाउंटर” की राह
कराची पुलिस और विशेष रूप से एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसपी चौधरी असलम खान और रहमान डकैत के बीच टकराव की कहानियां भी खूब मशहूर हैं। पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के बीच वर्षों तक “चोर-पुलिस” जैसा खेल चलता रहा, जिसमें कभी पुलिस छापे मारती, कभी रहमान के लोग पुलिस टीमों पर हमला कर जाते।
आख़िरकार 2009 में एक पुलिस ऑपरेशन/एनकाउंटर में रहमान डकैत की मौत की खबर सामने आई, जिसे कराची के अपराध इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना गया। हालांकि उसकी मौत के तरीके, समय और लोकेशन को लेकर भी कई तरह की कहानियां और साज़िश-थ्योरीज़ प्रचलित हैं, लेकिन मुख्यधारा रिकॉर्ड में इसे आधिकारिक पुलिस एनकाउंटर ही माना जाता है।
धुरंधर फिल्म में रहमान का चित्रण
अदित्य धर निर्देशित फिल्म “धुरंधर” भारत की गोपनीय कार्रवाइयों और पाकिस्तान, खासकर कराची-ल्यारी के पृष्ठभूमि पर आधारित एक फिक्शनल लेकिन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित थ्रिलर के रूप में पेश की गई है। फिल्म में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं, लेकिन विलेन के रूप में अक्षय खन्ना का रहमान बलोच उर्फ रहमान डकैत वाला किरदार दर्शकों और समीक्षकों के बीच खास चर्चा में रहा।
फिल्म में रहमान को ल्यारी पर राज करने वाले एक निर्दयी डॉन के रूप में दिखाया गया है, जो अपने कज़िन और सेकंड-इन-कमांड उज़ैर बलोच के साथ मिलकर इलाके पर खौफ का ऐसा साया डाल देता है कि पुलिस, नेता और आम आदमी सभी उससे डरते हैं। कई दृश्यों में उसकी निर्दयता, पारिवारिक संबंधों में हिंसा और दुश्मनों के साथ अमानवीय बर्ताव के तत्व सीधे-सीधे उन रिपोर्टों से प्रेरित दिखते हैं, जो असली रहमान डकैत की क्रूरता पर प्रकाशित हो चुकी हैं।
रील बनाम रियल: समानताएं और अंतर
धुरंधर में रहमान के जीवन की बुनियादी रूपरेखा—ल्यारी का डॉन होना, गैंगवार, राजनीतिक संरक्षण, जनता पर खौफ और पुलिस के साथ लंबे टकराव—असली रहमान डकैत की कहानी से मेल खाती है। फिल्म के बैकड्रॉप में भी कराची की गलियां, गैंग-संस्कृति और स्थानीय सत्ता समीकरणों को उसी तरह पेश किया गया है जैसा समाचार रिपोर्टें ल्यारी के बारे में बताती रही हैं।
हालांकि, फिल्म एक भारतीय नज़रिए से बनाई गई जासूसी-थ्रिलर है, जहां रहमान का किरदार भारतीय खुफिया अभियानों की कथा में फिट बैठाने के लिए कई स्तरों पर काल्पनिक भी किया गया है। असल ज़िंदगी का रहमान स्थानीय राजनीति, पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और कराची पुलिस से जुड़े संघर्षों का हिस्सा था, जबकि फिल्म में उसका उपयोग मुख्यतः भारतीय ऑपरेशंस और कथानक को रोमांचक बनाने के लिए किया गया है।
आलोचनाएं, बहसें और “रोबिनहुड बनाम दरिंदा” नैरेटिव
असली रहमान डकैत की छवि को लेकर समाज में दो तरह की कथाएं दिखती हैं। एक तरफ उसे खालिस खूनी और अपराधी बताया जाता है, जिसने हजारों जिंदगियां बर्बाद कीं, ड्रग्स और हथियारों का जाल फैलाया और ल्यारी के नाम को आतंक का पर्याय बना दिया।
दूसरी तरफ कुछ स्थानीय लोग और राजनीतिक समूह उसे कभी-कभी “रोबिनहुड” जैसे चरित्र के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो अपने इलाके के गरीबों की मदद भी करता था, रोज़गार देता था या पुलिस-जुल्म के खिलाफ खड़ा होता था। लेकिन अधिकांश स्वतंत्र रिपोर्टें उसके अपराधों के पैमाने और क्रूरता को देखते हुए इस “रोबिनहुड” छवि को काफी हद तक राजनीतिक/लोकल नैरेटिव मानती हैं, जिसे गैंग और उससे लाभान्वित ताकतों ने गढ़ा।
निष्कर्ष: रहमान डकैत का ऐतिहासिक स्थान
इतिहास और पत्रकारिता की नजर से देखें तो रहमान डकैत कराची और खासकर ल्यारी की गैंगवार का वह चेहरा है, जिसने 1990 के दशक से लेकर 2009 तक के दौर को खून, डर और अपराध से भर दिया। उसकी कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस पूरे ढांचे की है जिसमें गरीबी, राजनीतिक सरपरस्ती, कमजोर क़ानून व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स/हथियार तस्करी ने मिलकर एक “स्थानीय डॉन” को “छोटा-सा साम्राज्य” बनाने का मौका दिया।
धुरंधर फिल्म में अक्षय खन्ना का रहमान डकैत इसी असली किरदार की अतिरंजित लेकिन मूल रूप से मिलती-जुलती सिनेमाई प्रतिमूर्ति है, जो दर्शक को यह दिखाती है कि वास्तविक इतिहास कई बार फिल्म से कहीं ज्यादा भयावह और जटिल होता है।


